Thursday, December 13, 2012

नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता’

नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता’
बदनोर. ब\'चों के सर्वांगीण विकास के लिए नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास संभव है। यह विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू मुख्यालय से आए राजयोगी भगवान भाई ने राउप्रावि में नैतिक शिक्षा विषय पर व्यक्त किए। भगवान भाई ने कहा कि शैक्षणिक जगत में विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। प्रधानाध्यापक नानूराम खटीक ने कहा कि मूल्य शिक्षा से व्यक्तित्व महान बन सकता है। कार्यक्रम के दौरान जमुना शंकर शर्मा, अजय सिंह राव, जितेंद्र व्यास, शशि संचेती, उर्मिला पारीक व मोहम्मद इस्लाम आदि उपस्थित थे।

खुद आदर्श बनें, तब बनेगा आदर्श समाज

खुद आदर्श बनें, तब बनेगा आदर्श समाज

Matrix News | Jan 11, 2012, 01:53AM IST
 

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भास्कर न्यूज त्न बहादुरगढ़
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय माउंट आबू से आए भगवान भाई ने कहा कि आज की बिगड़ती परिस्थिति को देखते हुए समाज को सुधारने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान के छात्र भावी समाज है। अगर भावी समाज को आदर्श बनाना हैं तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है।
भगवान भाई ने पीडीएम पॉलीटेक्नीक कॉलेज में मंगलवार को टीचिंग स्टाफ और छात्र-छात्राओं के बीच विचार गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है, जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा
देता है।
शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्ग दर्शन देने वाला होना चाहिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है।
किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार पर नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाना चाहिए। शिक्षकों के हाव-भाव, उठना, बैठना, चलना व व्यवहार करना इन बातों का असर भी बच्चों के जीवन में पड़ता है। वहीं स्थानीय ब्रह्मकुमारी राजयोग सेवा केंद्र के संदीप भाई ने कहा कि एक दीपक से पूरा कमरा प्रकाशित होता है।
इसी तरह एक शिक्षक से हजारों बच्चे शिक्षित होते हैं। कॉलेज के प्राचार्य एमएम शर्मा ने कहा कि वर्तमान की परिस्थितियों को परिवर्तन करने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है। शिक्षकों को स्वयं के आचरण पर ध्यान देने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। इस मौके पर ओपी रुहिल व राजपाल मौजूद रहे।

नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वागीण विकास

नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वागीण विकास

Wednesday, 28 November 2012 02:20
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सहारनपुर: प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय मुख्यालय माउंट आबू के राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कहा कि बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वागीण विकास संभव है।
राजयोगी भगवान भाई ने केसीसीपीटी आर्य कन्या इंटर कालेज में छात्राओं को नैतिक शिक्षा का जीवन में महत्व बताते हुए कहा कि शैक्षिक जगत में विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यावहारिक ज्ञान एवं अन्य की तरफ प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश तथा असत्य से सत्य व बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाएं सच्ची शिक्षा है। समाज अमूर्त है और प्रेम, सदभावना, भाईचारा,नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों से ही संचालित होता है। एक प्रगतिशील एवं श्रेष्ठ समाज इन्हीं मूल्यों से परिभाषित होता है। शैक्षिक जगत से ही समाज के आधारभूत ढांचे का निर्माण होता है। राजयोगी ने कहा कि शिक्षा ऐसा बीज है जिससे जीवन फलदार वृक्ष बन जाता है। जब तक व्यवहारिक जीवन में सेवाभाव, परोपकार, धैर्य, त्याग, उदारता, नम्रता, सहनशीलता, सत्यता, पवित्रता आदि सदगुणी फल नही आते तब तक हमारी शिक्षा अधूरी है। व्यक्तिगत अच्छा व बुरा व्यक्ति अपने अंदर के गुणों से बनता है। गुणवान, चरित्रवान व्यक्ति सभी को प्रिय होता है। राजयोग ब्रह्मकुमारी केन्द्र संचालिका ब्रह्मकुमारी उर्मिला बहन ने कहा कि कुसंग, सिनेमा, व्यसन, फैशन से युवा भटकता है। चरित्र व गुणवान बच्चे देश व समाज की संपत्ति है। कार्यक्रम को प्रधानाचार्य सुशीला देवी, पंकज भाई ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी सिम्मी बहन, सुषमा जग्गा, रोशन, हरिन्द्र, राकेश शर्मा, आदि का योगदान रहा।

Monday, January 16, 2012

खुद आदर्श बनें, तब बनेगा आदर्श समाज भास्कर न्यूज त्न बहादुरगढ़ प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय माउंट आबू से आए भगवान भाई ने

खुद आदर्श बनें, तब बनेगा आदर्श समाज

भास्कर न्यूज त्न बहादुरगढ़

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय माउंट आबू से आए भगवान भाई ने कहा कि आज की बिगड़ती परिस्थिति को देखते हुए समाज को सुधारने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान के छात्र भावी समाज है। अगर भावी समाज को आदर्श बनाना हैं तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है।

भगवान भाई ने पीडीएम पॉलीटेक्नीक कॉलेज में मंगलवार को टीचिंग स्टाफ और छात्र-छात्राओं के बीच विचार गोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है, जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है।

शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्ग दर्शन देने वाला होना चाहिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है।

किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार पर नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाना चाहिए। शिक्षकों के हाव-भाव, उठना, बैठना, चलना व व्यवहार करना इन बातों का असर भी बच्चों के जीवन में पड़ता है। वहीं स्थानीय ब्रह्मकुमारी राजयोग सेवा केंद्र के संदीप भाई ने कहा कि एक दीपक से पूरा कमरा प्रकाशित होता है।

इसी तरह एक शिक्षक से हजारों बच्चे शिक्षित होते हैं। कॉलेज के प्राचार्य एमएम शर्मा ने कहा कि वर्तमान की परिस्थितियों को परिवर्तन करने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है। शिक्षकों को स्वयं के आचरण पर ध्यान देने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। इस मौके पर ओपी रुहिल व राजपाल मौजूद रहे।

भास्कर न्यूज त्न बहादुरगढ़ नाहरा-नाहरी रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी सेंटर में माउंट आबू से आए राजयोगी भगवान भाई का उनकी विलक्षण प्रतिभा और कर्मठ स


भास्कर न्यूज त्न बहादुरगढ़
नाहरा-नाहरी रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी सेंटर में माउंट आबू से आए राजयोगी भगवान भाई का उनकी विलक्षण प्रतिभा और कर्मठ समाजसेवा के चलते सम्मान किया गया।
सेंटर की संचालिका बीके अंजली बहन ने बताया कि भगवान भाई ने हरियाणा के विभिन्न शहरों में
नैतिक शिक्षा दी हैं।
उन्होंने बताया कि भगवन भाई को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड के चीफ एडीटर विश्वरूप राय चौधरी द्वारा भी सम्मानित किया गया है। महाराष्ट्र के सांगसी जिले एक साधारण परिवार में जन्मे भगवान भाई को रद्दी की किताबों में ब्रह्मकुमारी सेवा केंद्र के किताबों के कुछ पन्ने मिले।
उन पन्नों ने उनका जीवन बदलकर रख दिया। इसके बाद तीस वर्षों के राजयोग के अभ्यास द्वारा उन्होंने अपना मनोबल व आत्मबल बढ़ाया। इसके फलस्वरूप आज भगवान भाई ने पांच हजार स्कूलों में तथा 800 जेलों में जाकर सेवा का नया रिकार्ड बनाया।
उनके प्रयास से हजारों कैदियों द्वारा अपराध को छोड़कर अपने जीवन में सद्भावना को अपनाया। सम्मान समारोह अवसर पर सेंटर की बीके विनीता, अमृता भी शामिल रहीं।

रेवाड़ी त्न जिला कारागार में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर

रेवाड़ी त्न जिला कारागार में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले ब्रह्मकुमार भगवान ने विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सफल जीवन के मंत्र बताए। उन्होंने कहा कि जब महर्षि वाल्मीकि ने अपने जीवन में किए हुए अपराधों को महसूस कर स्वयं के संस्कारों को परिवर्तन कर रामायण लिखने वाले वाल्मीकि बने तो क्या हम अपनी गलतियों को सुधार कर महान नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि यह कारागार नहीं बल्कि सुधारगृह है। इसमें व्यक्ति को अपनी बुराइयों का सुधार करने के लिए रखा गया है। बदला लेने से समस्या का समाधान होने के बजाय और बढ़ जाती हैं इसलिए स्वयं को बदलना चाहिए। कारागृह स्वयं में परिवर्तन लाने की तपोस्थली है। इस एकांत के तपोस्थली में बैठकर स्वयं को परिवर्तन करने के लिए सोचना चाहिए। जिस बुराई के कारण वे यहां आए हैं उस बुराई को त्याग करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारी वृत्ति, दृष्टि और कृति में जो अवगुण या बुराइयों हैं उसे
भगाना चाहिए।
उन्होंने जीओ और जीने दो की भावना को विकसित करने का आह्वान किया। इस मौके पर जेल उपाधीक्षक अशोक शर्मा ने ऐसे आयोजनों को निरंतर करते रहने का आह्वान किया।

एक आदर्श समाज में नैतिक सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्य प्रचलित होते है। नैतिक मूल्यों का हमें सम्मान करना चाहिए। मूल्य शिक्षा द्वारा ही बेहतर जीवन जीने की



एक आदर्श समाज में नैतिक सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्य प्रचलित होते है। नैतिक मूल्यों का हमें सम्मान करना चाहिए। मूल्य शिक्षा द्वारा ही बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उक्त उदगार प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मांउट आबु से पधारे हुए राजयोगी ब्रम्हकुमार भगवान भाई ने कहे। वे शारदा विद्या निकेतन और सरस्वती विद्या मंदिर में छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए बोल रहे थे।
भगवान भाई ने कहा लालच भ्रम, बेईमानी, चोरी, ठगी, नकारात्मक विचार मनुष्य को नैतिकता के विरूद्घ आचरण करने के लिए उकराता है। उन्होने बताया कि हमें अनैतिकता का मार्ग छोडकर नैतिकता के तरफ जाना है। जीवन में नैतिक शिक्षा आचरण में लाना ही शिक्षा का मुल उददेश्य है। नैतिक मूल्यों की धारण से आंतरिक शक्तियों का विकास होता है और आत्मबल, मनोबल बढता है। उन्होने कहा कि नैतिक मूल्यों से युक्त जीवन ही सभी को पसंद आता है। सदगुणों की धारणा से ही हम प्रशंसा के पान बन सकते है। उन्होने बताया कि मूल्य ही जीवन की सुदंरता और वरदान है। जीवन में धारण किये हुए मूल्य ही हमारे श्रैष्ठ चरित्र की निशानी है। मूल्यों को जीवन में धारण करने की हमारे मन में आस्था निर्माण करने की आवश्यकता है।
भगवान भाई ने कहा कि मूल्य ही हमारे जीवन की अनमोल निधि है। मूल्यों के आधार से हम अपने जीवन में खुशी प्रदान कर सकते है। मूल्य ही हमारे सच्चे मित्र है। उन्होने आगे बताया कि शिक्षा उददेश्य बंधनों से मुक्ति के तरफ से जाना रही है नैतिक शिक्षा द्वारा प्राप्त मुल्यों के आधार से ही हम निर्वधंन तथा स्वालंबी बन सकत है। मूल्यों के आधार से ही यह चलता है। उन्होने बताया कि अगर मूल्यों का हास होगा तो यह संसार विरान हो जायेगा।
राक्षसी प्रवृत्ति द्वारा जीवन दिन प्रति दिन दुखी अशांत बनता जायेगा। उन्होने बताया कि अगर जीवन मूल्यों को नष्टï करोगे तो हमारा जीवन भी ऐसा ही व्यर्थ नष्टï हो जायेगा। जो मूल्यों की रक्षा करेगा उसकी ही रक्षा मूल्य करेंगे अर्थात वह व्यक्ति अमरत्वा को प्राप्त करेगा। उन्होने बताया कि अमर बनना ही शिक्षा का मूल उददेश्य है। स्थानीय ब्रम्हकुमारीय की संचालिका बीके ज्योति बहन ने सभी को ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय का परिचय दिया उन्होने बताया कि आधयात्मीकता नही अपनाने का मतलब जीवन में मानवीय नैतिक मुल्य नही अपनाना है।